Wasooli

मोहल्ले के दादा को उनके चेले ने खबर दी, “उस्ताद, आज वसूली कम हुई है|”
“अच्छा? किसकी इतनी हिम्मत? किस घर से हफ्ता नहीं मिला?”, दादा ने ग़ुस्से अंदाज़ में पूछा |
“उस्ताद, आप के घर वालो ने कम हफ़्ता दिया|” सहम कर चेले ने आहिस्ते से कहा|
“क्या?? उनकी इतनी हिम्मत? कल से मैं ही घर से वसूलूँगा”, ये कहते हुए मोहल्ले के दादा ने चाय की चुस्की ली, गले का रूमाल सीधा किया और मुठ्ठी बांधते हुए अपने घर की ओर चल दिया|